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shivling par kya nahi chadana chahiye

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शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए

Shivling Par kya Nahi Chadana Chahiye

हिन्दू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी- देवताओं के लिए समर्पित होते है। सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी विशेष भगवान की पूजा-आराधना की जाती है। इसी तरह सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा - आराधना की जाती है। शिवपुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से धन संबंधी और कुंडली दोष के जैसे कालसर्प दोष आदि का निवारण होता है। शिवजी को खुश करने के लिए भक्त शिवलिंग पर कई चीजें जैसे भांग-धतूरा, दूध, चंदन, और भस्म आदि अर्पित करते हैं, लेकिन कई बार भूलवश ऐसी चीजें शिवलिंग पर चढ़ाने लगते है जो शास्त्रों में वर्जित माना गया है। आइये जानते हैं वो कौन कौन सी चीजें हैं जिसको शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए ।

शंख का जल : शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित करना निषेध माना गया है। क्योंकि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु जी का भक्त था। इसलिए शंख से विष्णु जी की पूजा बहुत अच्छी मानी जाती है न कि शिव जी पूजा ।

तुलसी का पत्ता : शिवलिंग पर तुलसी के पत्तों को भी चढ़ाना निषेध माना गया है। कहते हैं कि जलंधर नामक असुर की पत्नी बृंदा की आंसुओं से तुलसी की उत्पत्ति हुई। जिसे भगवान विष्णु की पत्नी के रूप में स्वीकार किया है। इसलिए शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।

तिल : ऐसा माना गया है कि तिल  भगवान विष्णु जी के मैल से उत्पन्न हुआ है। इसलिए इसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता है।

खंडित / टूटे हुए चावल : भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए शिवलिंग पर टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए।

हल्दी : इसे भी शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है। क्योंकि हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के साथ माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाया जाता है।

कुमकुम : इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जबकि भगवान शिव जी वैरागी हैं। इसलिए शिवलिंग पर कभी भी भूलकर भी कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए।

उबला हुआ दूध : उबले हुए दूध से शिवलिंग का अभिषेक ना करें, शिवलिंग का अभिषेक सदैव गाय के कच्चे दूध से और ठंडे जल से करना चाहिए।

नारियल : नारियल को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिसका संबंध भगवान विष्णु जी के साथ है। इसलिए शिवलिंग के ऊपर चाहकर भी नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए ।

केतकी का फूल : केतकी का फूल भी भगवान शिव को कभी भी नहीं चढ़ाना चाहिए।  केतकी के फूल एक बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे। तभी वहां एक विराट लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सहमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा। अत: दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग की छोर ढूढंने निकले।

छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए। ब्रह्मा जी भी सफल नहीं हुए परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुँच गए थे। उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया। ब्रह्मा जी के असत्य कहने पर स्वयं शिव वहाँ प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की एक सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि शिव जी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा।

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